कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ

कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ

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तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!

तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।

कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......

तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!

तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।

कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात

मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी

यूँ ही भटकते रहते हैं अरमान तुझसे मिलने के, न ये दिल ठहरता है न तेरा इंतज़ार रुकता है

लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......