तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....

तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....

Share:

More Like This

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..

"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न

गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका

बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..

"अकेले कैसे रहा जाता है, कुछ लोग यही सिखाने हमारी जिंदगी मे आते है

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता