कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!
जिन्हें पता होता हैं। की अकेलापन क्या होता हैं । ऐसे लोग दुसरो के लिए । हमेशा हाज़िर रहते हैं ।
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
काश वो भी आकर हम से कह दे, मैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए...!!
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!
जिन्हें पता होता हैं। की अकेलापन क्या होता हैं । ऐसे लोग दुसरो के लिए । हमेशा हाज़िर रहते हैं ।
यकीनन मुझे तलाशती हैं तेरी आँखें....ये बात अलग है,, तुम ज़ाहिर नही होने देते...
काश वो भी आकर हम से कह दे, मैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए...!!
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!