हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.

हमें भी शौक था दरिया -ऐ इश्क में तैरने का, एक शख्स ने ऐसा डुबाया कि अभी तक किनारा न मिला.

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एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता

नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!

एक ख़्वाब था की वह भी मुझे चाहे मेरी तरह पर ख़्वाब ही रह गया

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता

नसीब का सब खेल है वरना मोहब्बत तो हम भी दीवाने की तरह किये थे.

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!