बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।

Share:

More Like This

कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से

काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!

कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न

तेरे बिना जीना बोहोत मुश्किल है ... और तुझे ये बताना और भी मुश्किल .

जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये, अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये, जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये”

कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से

काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!

कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न

तेरे बिना जीना बोहोत मुश्किल है ... और तुझे ये बताना और भी मुश्किल .

जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये, अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये, जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये”