जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना,क्योक़ि बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।

जिदंगी मे कभी भी किसी को बेकार मत समझना,क्योक़ि बंद पडी घडी भी दिन में दो बार सही समय बताती है।

डॉ० एपीजे अब्दुल कलाम
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"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना

जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो

अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे

भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा

"बदलना" ख़राब नहीं हैं , ख़राब हैं बदल कर , पहले से "बदतर" हो जाना

जरूरत से ज्यादा सोचकर हम ऐसी समस्या खड़ी कर लेते है जो असल मे है भी नही

अगर कोई पसंद आ जाए तो दूसरों से नहीं पूछना चाहिए वो कैसा है

अगर ज़िन्दगी में सुकून चाहते हो तो लोगों की बातों को दिल से लगाना छोड़ दो

अभी से वो होना शुरू कीजिये जो आप भविष्य में होंगे

भगवान से कुछ मांगना है तो सदबुद्धिद मांगिए बाकी सब अपने आप मिल जायेगा