“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती
जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं
कभी भी अपने अतीत, धन, नकारात्मकता और अन्य लोगो के CONTROL में न रहे
मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों ना हो उसके रास्ते हमेशा पैरों के नीचे से ही जाते है।
हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है
“अहंकार” और “संस्कार” में फ़र्क़ है… “अहंकार” दूसरों को झुकाकर खुश होता है, “संस्कार” स्वयं झुककर खुश होता है..!
पैर में मोच और गिरी हुई सोच, कभी इंसान को आगे बढ़ने नहीं देती
जिंदगी हमेशा एक मौका और देती है आसान शब्दों में जिसे “आज” कहते हैं
कभी भी अपने अतीत, धन, नकारात्मकता और अन्य लोगो के CONTROL में न रहे
मंजिल चाहे कितनी भी ऊँची क्यों ना हो उसके रास्ते हमेशा पैरों के नीचे से ही जाते है।
हमेशा खुश रहा करो ये सोच कर की दुनिया में हमसे ज्यादा परेशान ओर लोग भी है