अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

अब वफा की उम्मीद भी किस से करे भला मिटटी के बने लोग कागजो मे बिक जाते है।

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जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…

रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!

जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।

जो मैं रूठ जाऊँ तो तुम मना लेना, कुछ न कहना बस सीने से लगा लेना।

बारिश की बूँदों में झलकती है तस्वीर उनकी‬‎ और हम उनसे मिलनें की चाहत में भीग जाते हैं‬…

रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात ईस पे मैं मरता रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करता रहू.

माँ कहती है मेरी दौलत है तू,,, और बेटा किसी और को ज़िन्दगी मान बैठा है.

कुछ शिकवे ऐसे थे कि, खुद ही किये और खुद ही सुने!!

जिसको आज मुझमें हज़ारों गलतियां नज़र आती है, कभी उसी ने कहा था “तुम” जैसे भी हो…मेरे हो…।