जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!
कभी मिले फुर्सत तो इतना जरुर बताना वो कौनसी मोहब्बत थी जो हम तुम्हे ना दे सके
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !
जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!
कभी मिले फुर्सत तो इतना जरुर बताना वो कौनसी मोहब्बत थी जो हम तुम्हे ना दे सके
भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !