हम उनसे तो लड़ लेंगे जो खुले आम दुश्मनी करते हैं... लेकिन उनका क्या करे जो लोग मुस्कुरा के दर्द देते हैं...
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
हम उनसे तो लड़ लेंगे जो खुले आम दुश्मनी करते हैं... लेकिन उनका क्या करे जो लोग मुस्कुरा के दर्द देते हैं...
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
कोई रूह का तलबगार मिले तो हम भी महोब्बत कर ले… यहाँ दिल तो बहुत मिलते है, बस कोई दिल से नहीं मिलता
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??