बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
हम उनसे तो लड़ लेंगे जो खुले आम दुश्मनी करते हैं... लेकिन उनका क्या करे जो लोग मुस्कुरा के दर्द देते हैं...
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
हम उनसे तो लड़ लेंगे जो खुले आम दुश्मनी करते हैं... लेकिन उनका क्या करे जो लोग मुस्कुरा के दर्द देते हैं...
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता
हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
कितने अनमोल होते हैं ये अपनों के रिश्ते कोई याद न करे तो भी इंतज़ार रहता है