उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये

उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये

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कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!

कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

नींद से क्या शिकवा जो आती नहीं, कसूर तो उस चेहरे का है जो सोने नहीं देता !

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!