उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये

उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये

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एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है

सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

कुछ बुरी आदतें ता उम्र साथ नहीं छोड़ती....बस उन्हीं आदतों मे से एक है वो..!!?

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।

उसे ये कोन बतलाये, उसे ये कोन समझाए कि खामोश रहने से ताल्लुक टूट जाते है

सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

कुछ बुरी आदतें ता उम्र साथ नहीं छोड़ती....बस उन्हीं आदतों मे से एक है वो..!!?

क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही