चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!

चैन से गुज़र रही थी ज़िन्दगी, और फिर तुम मिल गए!

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कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

तुमको भी कहाँ जरूरत है मेरी, तुम्हारे लिये तो मैं भी बिछड़ा हुआ जमाना हूँ.....!!

आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??

आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....

क्यूँ उदास बेठे हो इस तरहा अंधेरे मैं, दुःख कम नहीं होते रौशनी बुझाने से