तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !
यकीनन तुम्हें तलाशती हैं मेरी आंखें........ये बात अलग है हम ज़ाहिर नहीं होने देते.....
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.
हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!
जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम...
वो मेरी मोहब्बत है, और मैं सिर्फ उसकी एक आदत !
यकीनन तुम्हें तलाशती हैं मेरी आंखें........ये बात अलग है हम ज़ाहिर नहीं होने देते.....