मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.

मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.

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शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!

शिकायत तो खुद से है तुम से तो आज भी इश्क़ है

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

तेरी मोहब्बत को कभी खेल नही समजा, वरना खेल तो इतने खेले है कि कभी हारे नही….!

किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!