दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!
दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं
मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !
तुम क्या जानो हम अपने आप में कितने अकेले है, पूछो इन रातो से जो रोज़ कहती है के खुदा के लिए आज तो सो जाओ !
किसी से कभी कोई उम्मीद मत रखो क्योंकि उम्मीद हमेशा दर्द देती है!