सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने
हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।
उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता
सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने
हर रोज़, हर वक़्त तुम्हारा ही ख्याल ना जाने किस कर्ज़ की किश्त हो तुम
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।
उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता