आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की

आदत बदल सी गई है वक़्त काटने की, हिम्मत ही नहीं होती अपना दर्द बांटने की

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कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता, पता नहीं तेरी खूबी है या तेरी कमी

अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

तेरी जगह आज भी कोई नहीं ले सकता, पता नहीं तेरी खूबी है या तेरी कमी

अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?

मुस्कुराने की अब वजह याद नहीं रहती, पाला है बड़े नाज़ से मेरे गमों ने मुझे!!