तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....
निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...
तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !
तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है .....
निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...
तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..
यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !