बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

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कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

यूँ ही कितनी आसानी से पलट जाते है कुछ लोग

काश वो भी आकर हम से कह देमैं भी तन्हाँ हूँ, तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम, तेरे लिए !

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

मुझे "परखने " में पूरी ज़िन्दगी लगा दी उसने काश कुछ वक़्त "समझने" में लगाया होता