जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न
जिस्म तो फिर भी थक हार के सो जाता है....काश दिल का भी कोई बिस्तर होता.....
दर्द सिर का हो या दिल का..दोनों बहुत बुरे होते है
सब कुछ ठीक ही चल रहा है ना जाने क्यों उदास हु मैं
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कभी सोचा न था की वो भी मुझे तनहा कर जायेगा!जो अक्सर परेशान देखकर कहता था.... मैं हूँ न