लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं.. की क्या कमी रह गई थी तेरा होने में.
ज़िंदगी में प्यार क्या होता है ये उस शक्स से पूछो जिसने दिल टूटने के बाद भी इंतज़ार किया हो
खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं.. की क्या कमी रह गई थी तेरा होने में.
ज़िंदगी में प्यार क्या होता है ये उस शक्स से पूछो जिसने दिल टूटने के बाद भी इंतज़ार किया हो
खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।