उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
मेरी कोशीश हमेशा ही नाकाम रही पहले तूझे पाने की और अब तुझे भुलाने की
क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!
उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
मेरी कोशीश हमेशा ही नाकाम रही पहले तूझे पाने की और अब तुझे भुलाने की
क्या कहें कुछ नहीं है कहने को, हाय क्या गम मिला है सहने को.
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
इन् तरसती निग़ाहों का ख़्वाब है तू, आजा के बिन तेरे बहुत उदास हूँ मैं..!!