अब इन आँखों से भी जलन होती हैं मुझे ! खुली हो तो याद तेरी, और बंद हो तो ख्वाब तेरे !
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है, हम तन्हाई में बैठे रोते है, लोगो ने हमे महफ़िल में हस्ते देखा है।
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..
अब इन आँखों से भी जलन होती हैं मुझे ! खुली हो तो याद तेरी, और बंद हो तो ख्वाब तेरे !
सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम
रिश्ते और पतंग जितनी उँचाई पर होते हैं काटने वालो की संख्या उतनी अधिक होती हैं?
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
मेरे दिल का दर्द किसने देखा है, मुझे बस खुदा ने तड़पते देखा है, हम तन्हाई में बैठे रोते है, लोगो ने हमे महफ़िल में हस्ते देखा है।
प्यार भी हम करें, इन्तजार भी हम, जताये भी हम और रोयें भी हम..