तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

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यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !

खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।

यकीनन हो रही होंगी बैचेनियां तुम्हें भी, ये और बात है कि तुम नजरअंदाज कर रहे हो...

बेशक मोहब्बत ना कर पर बात तो कर, तेरा यु खामोश रहना बड़ी तकलीफ देता है..

तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती

बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये

उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !

खुशीयां तो कब से रूठ गई हैं मुझसे, काश इन गमों को भी कीसी की नजर लग जाये ।