सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम

सफर में कही तो दगा खा गए हम जहाँ से चले थे वही आ गए हम

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खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं, रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

कैसे बनाऊँ तेरी यादों से दूरियां .......दो कदम जाकर सौ कदम लौट आती हूँ .......

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा

खुश तो वो रहते हैं जो जिस्मो से खेलते हैं, रूह से मोहब्बत करने वालो को अक्सर तड़पते देखा है

दिल मेरा उसने ये कहकर वापस कर दिया... दुसरा दिजीए... ये तो टुटा हुआ है....

कैसे बनाऊँ तेरी यादों से दूरियां .......दो कदम जाकर सौ कदम लौट आती हूँ .......

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

दर्द जब हद से ज्यादा बढ़ जाए, तो वो ख़ामोशी का रूप ले लेता है

रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा