बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता
बहुत भीड हो गई है लोगों के दिलों में...इसलिए आजकल हम अकेले ही रहते हैं...!
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
सब ख़फ़ा है मेरे लहजे से...पर मेरे हाल से कोई रूबरू तक न हुआ.....
जिनको जाना होता है वो चले ही जाते है किसी के रोने से उनको कोई फर्क नहीं पड़ता