किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तभी मेरी याद उसे अब नहीं आती ..
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
कोई तो कर रहा है मेरी कमी पूरी तभी मेरी याद उसे अब नहीं आती ..
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
तुम्हारे बिना रह तो सकती हूँ... मगर.. खुश नहीं रह सकती
नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे