किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

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हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं

कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

हादसे कुछ दिल पे ऐसे हो गए, हम समुन्दर से भी गहरे हो गए

दोबारा इश्क़ हुआ तो तुझसे हे होगा खफा हूँ मैं बेवफा नहीं

कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...

तेरी बेरुखी ने छीन ली है शरारतें मेरी..और लोग समझते हैं कि मैं सुधर गया हूँ..!!!

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो