किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!

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ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?

जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!

मैं मर भी जाऊँ तोह उसे खबर न देना कही वक़्त न बर्बाद हो जाये उसका

ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,

नुक्स निकालते है वो इस कदर हम मे, जैसे उन्हे खुदा चाहिए था और हम इंसान निकले ?

उस हंसती हुई तस्वीर को क्या मालूम की कोई उसे देख कितने रोता है

मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?

जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!

मैं मर भी जाऊँ तोह उसे खबर न देना कही वक़्त न बर्बाद हो जाये उसका