मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

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ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है

छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है

किसी से रास्ता पूछने से पहले यह सुनिश्चित करले कि कहीं वह स्वयं तो रास्ता भटका हुआ नहीं है।

अवसर का इंतजार नही निर्माण करना सीखो

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨

ज़िंदगी को आसान नहीं बस खुद को मजबूत बनाना पड़ता है

छाता ओर दिमाग तभी काम करते है जब वो खुले हो बंद होने पर दोनों बोझ लगते है

किसी से रास्ता पूछने से पहले यह सुनिश्चित करले कि कहीं वह स्वयं तो रास्ता भटका हुआ नहीं है।

अवसर का इंतजार नही निर्माण करना सीखो

अगर इंसान सच्चा होगा तो सब कुछ अच्छा होगा

कोई भी हमें सुख या दुख नही दे सकता , बल्कि हमारे सोचने का तरीका ही हमारे सुख व दुख का कारण होता है।✨