मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है, वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की तो बात ही क्या है।

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अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

कुछ भी काम कर लो, मगर उस काम में तुमसे बेहतर "कोई नही होना चाहिए"

यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले अपने ‘अभिमान’ को नाश कर डालो ।

कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.

अगर तुम्हें किसी काम के लिए खुद से ज्यादा किसी ओर का MOTIVATION चाहिए तो PLEASE भाई वो काम मत करो

शीशे की तरह चरित्रवान बनो ताकि लोग तुम्हे देखकर अपने चरित्र के दोषों को दूर करें जैसा कि वे शीशे को देखकर अपने चेहरे के दोषों को दूर करते हैं

कुछ भी काम कर लो, मगर उस काम में तुमसे बेहतर "कोई नही होना चाहिए"

यदि सफल होना चाहते हो, तो पहले अपने ‘अभिमान’ को नाश कर डालो ।

कभी यह मत सोचो कि आप अकेले हो बल्कि यह सोचो की आप अकेले ही काफी हो

न तो इतने कड़वे बनो की कोई थूक दे और न ही इतने मीठे बनों की कोई निगल जाए.