मुझे फुरसत कहा जो मौसम सुहाना देखू महादेव की यादों से निकलू तो जमाना देखू
जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।
मुझे फुरसत कहा जो मौसम सुहाना देखू महादेव की यादों से निकलू तो जमाना देखू
जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥
॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥
कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम
जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है
अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।