मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

मन, वचन और कर्म से मनुष्य जिस विषय का बार – बार ध्यान करता है, वही उसे अपनी और आकर्षित कर लेता है, अत: सदैव अच्छे कर्म ही करने चाहिए।

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मुझे फुरसत कहा जो मौसम सुहाना देखू महादेव की यादों से निकलू तो जमाना देखू

जय माँ वैष्णो देवी..पहाडा वाली..ज्योता वाली॥

॥ ॐ ह्रीं दुं दुर्गाय नमः ॥

कण कण में विष्णु बसें जन जन में श्रीराम प्राणों में माँ जानकी मन में बसे हनुमान ! जय श्री राम

जो उपकार करे, उसका प्रत्युपकार करना चाहिए, यही सनातन धर्म है

अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।

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अहिंसा ही धर्म है, वही जिंदगी का एक रास्ता है।