प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?
हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा
दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!
प्रेम कि शिक्षा लेनी है तो भंवरे से लो. कठोर लकड़ी को छेद देने वाला भँवरा, कमल में स्वयं को बंद कर लेता है तो सिर्फ इसलिए कि उसे कमल से प्रेम होता है. यदि वह कमल को छेदकर बहार आ जायेगा तो कमल के प्रति उसका प्रेम रहा ही कहाँ?
हर सुबह इस यकीन के साथ उठो कि मेरा आज बीते हुए कल से बेहतर होगा
दिल लगाने से अच्छा है, पेड़ लगाऐ, वोह घाव नही कम से कम छाव तोह देगे
यहां हर किसी को दरारों में झांकने की आदत है दरवाजा खोल दो तो कोई पूछने भी नही आयेगा
गलत तरीके से पाई गई सफलता पर व्यक्ति घमंड कर सकता है, गर्व नही
'श्रद्धा' ज्ञान देती हैं, 'नम्रता' मान देती हैं, 'योग्यता' स्थान देती हैं पर तीनों मिल जाए तो... व्यक्ति को हर जगह 'सम्मान' देती हैं...!