जो किसी दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहकर शत्रु से बुद्धि पूर्वक व्यवहार करता है, बलवानों के साथ युद्ध पसंद नहीं करता तथा समय आने पर पराक्रम दिखाता है, वही धीर है।

जो किसी दुर्बल का अपमान नहीं करता, सदा सावधान रहकर शत्रु से बुद्धि पूर्वक व्यवहार करता है, बलवानों के साथ युद्ध पसंद नहीं करता तथा समय आने पर पराक्रम दिखाता है, वही धीर है।

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आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है

रोना बंद करो और अपनी तकलीफों से खुद लड़ना सीखो क्योंकि साथ देने वाले भी शमशान से आगे नही जाते..

शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही

डिग्रियाँ तो तालीम के ख़र्चे की रसीदें हैं...इल्म वही है जो किरदार में झलकता है.

अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है

आप चाहे कितना भी भलाई का काम कर लो, मगर, उस भलाई की उम्र सिर्फ अगली गलती होने तक ही है

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शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

संसार में सुई बनकर रहे, कैंची बनकर नही क्योंकि सुई 2 को 1 कर देती है और कैंची 1 को 2 कर देती है अर्थात सबको जोड़ो, तोड़ो नही

डिग्रियाँ तो तालीम के ख़र्चे की रसीदें हैं...इल्म वही है जो किरदार में झलकता है.

अगर हम खुद की माने और विश्वाश करे तो हमारा हर कदम सफलता है