दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है. |
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
सच कहा था किसी ने तन्हाई में जीना सीख लो मोहब्बत जितनी भी सच्ची हो साथ छोड़ ही जाती है. |
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.