वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

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कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.

कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम

कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का

सुना था हमने दर्द अक्सर बेदर्द लोग देते हैं मगर हमारी दुनिया उजाड़ी है एक मासूम चेहरे ने

अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये

ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही

हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.