आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं.. की क्या कमी रह गई थी तेरा होने में.
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं
आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं.. की क्या कमी रह गई थी तेरा होने में.
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
ये जो ज़िन्दगी है ना. तेरे बिन अधूरी है
कितने शौक से छोड़ दिया तुमने बात करना जैसे सदियों से तेरे ऊपर कोई बोझ थे हम
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
कैसे भुला दूँ उस भूलने वाले को मैं.. मौत इंसानों को आती है यादों को नहीं