जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती
बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...
ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..
जब मोहब्बत बे-पनाह हो जाये ना.. तोह फिर पनाह कही नही मिलती
बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...
ढूंढ़ रहा हु लेकिन नाकाम हु अभी तक, वो लम्हा जिस में तुम याद ना आये,
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..