ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.
कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...
एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
ऐ दिल तू क्यों रोता है, ये दुनिया है यहाँ ऐसा ही होता है.
कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...
एक सफर जहां फिरसे सब 'शून्य' से शुरू करना होगा।
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
मोत से तो दुनिया मरती हैं आशीक तो बस प्यार से ही मर जाता हैं
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।