बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को
बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .
बदले नहीं हे हम बस जान गए हे दुनिया को
बेटा प्यार से झुका सकता है हथियार से नहीं धोखे से मार सकता है वार से नहीं
गुरूर मे इंसान को कभी इंसान नहीं देखता जैसे छत पर चढ़ जाओ तो अपना ही माकन नहीं देखता
हम बात ख़त्म नहीं करते कहानी ख़त्म करते हैं
मौज़ लो, रोज़ लो, ना मिले तो ख़ोज लो
झूठ इसलिए बिक जाता है क्योकि सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती .