खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं
खामोश ही रहने दो मुझे यकीन मनो में जवाब बहुत बुरा देता हु
जिंदगी में भी अपने किसी हुनर पर घमंड मत करना क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता है
बदलना कौन चाहता है जनाब लोग यहां बदलने को मज़बूर कर देते हैं
क्यो ना गुरूर करू मै अपने आप पे….मुझे उसने चाहा जिसके चाहने वाले हजारो थे!
खुद से कभी नहीं हरा तो ये दुनिया क्या हरायेगी
नहीं चाहिए जो मेरी किस्मत में नहीं भीख मांग कर जीना मेरी फितरत मे नहीं