तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

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उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...

चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।

उनका बादा भी अजीब था - बोले जिन्दगी भर साथ निभाएंगे, पर पागल हम थे - ये पूछना भूल ही गए के मोहबत के साथ या यादो के साथ !

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

बदल दिया है मुझे मेरे चाहने वालो ने ही… वरना मुझ जैसे शख्स में इतनी खामोशी कहाँ थी...

चुप रहना मेरी ताक़त है कमज़ोरी नहीं, अकेले रहना मेरी चाहत है, मजबूरी नहीं।

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

तजुर्बे ने एक ही बात सिखाई है, नया दर्द ही पुराने दर्द की दवाई है।