तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

Share:

More Like This

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!

जिसकी सजा तुम हो, मुझे ऐसा कोई गुनाह करना है.

मैं क्यों पुकारू उसे कि लोट आओ उसे खबर नहीं कि कुछ नहीं मेरे पास उसके सिवाए.

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....

मुझे भी सिखा दो भूल जाने का हुनर मैं थक गया हूँ हर लम्हा हर सांस तुम्हे याद करते करते

मोहबत के सफ़र में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई..!