मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!
खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
आज सारा दिन उदास गुजर गया, अभी रात की सजा बाकि है....
उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!
खेलने दो उन्हे जब तक जी न भर जाए उनका, मोहब्बत चार दिन कि थी तो शौक कितने दिन का होगा
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है