बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
मत पूछ कैसे गुजर रही है जिंदगी, उस दौर से गुजर रहा हूँ जो गुजरता ही नहीं है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का
बस एक बार, उलझना है तुमसे, बहुत कुछ, सुलझाने के लिये
अब मुझे रास आ गई है तन्हाइयाँ... आप अपने वक़्त का अचार डाल लिजिये
आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं।
कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |
मत पूछ कैसे गुजर रही है जिंदगी, उस दौर से गुजर रहा हूँ जो गुजरता ही नहीं है
कितनी जल्दी फैसला कर लिया जाने का, एक मौका भी नहीं दिया मनाने का