बड़ी कश्मोकश है इन दिनो ज़िन्दगी में...किसी को ढूंढते फिर रहे हैं हर किसी में....

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माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..

डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…

वो मन बना चुके थे दूर जाने का, हमे लगा हमे मनाना नहीं आता

बस इतना सा असर होगा हमारी यादों का, कि कभी-कभी तुम बिना बात के मुस्कुराओगे.

तेरी मुस्कान, तेरा लहज़ा, और तेरे मासूम से अल्फाज़..और क्या कहूँ... बस बहुत याद आते हो तुम..

डाल कर...आदत बेपनाह मोहब्बत की...अब वो कहते है...कि...समझा करो वक़्त नही है...

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।