मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे

मैने तो बस तुमसे बेइंतहा मोहबत कि है, ना तुम्हे पाने के बारे मे सोचा है ना खोने के बारे मे

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कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।

कितनी महँगी पड़ी मुझे मुस्कुराने की अदा, सब अकेला छोड़ गए मुझे ये कहकर क़ि तुम तो अकेले भी खुश रह लेते हो

तुम पर सिर्फ मेरा हक़ है ऐसा कहने वाला ही अब साथ छोड़ गया

कभी कभी नाराज़गी दूसरों से ज्यादा खुद से होती है |

उदास छोड़ गया वो मुझको, खील उठता था मैं जिसके मुस्कुराने से ..!!

दिल तो करता हैं की रूठ जाऊँ कभी बच्चों की तरह फिर सोचता हूँ कि मनाएगा कौन….?

कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।