वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे

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काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।

अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !

काश ये दिल बेजान होता…न किसी के आने से धडकता…न किसी के जाने से तडपता…!

क्यों लगता है वो आसपास है जिसका दूर तक कोई सुराग नहीं।

अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले

अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में

भूल सा गया हैं बो मुझे, समज नहीं आ रहा की हम आम हो गए उनके लिए या कोई खास बन गया है !