चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
तेरे दिल के बाजार में मै रोज़ बिकती हुं, कुछ लफ्ज़ तेरी यादों के हर रोज़ लिखती हुं
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके, बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना..
चाह कर भी पूछ नहीं सकते हाल उनका, डर है कहीं कह ना दे के ये हक तुम्हे किसने दिया। ?
चलो बिखरने देते है जिंदगी को सँभालने की भी हद होती है
तेरे दिल के बाजार में मै रोज़ बिकती हुं, कुछ लफ्ज़ तेरी यादों के हर रोज़ लिखती हुं
जो ज़ख़्म लगे हुए हैं दिल पर उनका मर्ज़ क्या होता है महफ़िल वालों तुम क्या जानो तन्हाई का दर्द क्या होता है....
बस तेरी कामि है ए मौत, दिल वो ले गयी जान तू ले जा..
मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके, बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना..