एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे
एक बार माफ करके अच्छे बन जाओ लेकिन... मगर दुबारा उसी इन्सान पर भरोसा कर के बेवकूफ मत बनो
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।
किसी के दर्द की बैंडेज मत बनो क्योंकि जब घाव भर जाएगा तो तुम कूड़ेदान में फेंक दिए जाओग
दूसरों की गलती से भी सीखा करो खुद की गलती से सीखने चलोगे तो सफलता जल्दी नहीं मिलेगी
रिश्ते भी इमारत की ही तरह होते हैं, हल्की - फुल्की दरारें नज़र आएं तो, ढ़हाइये नहीं मरम्मत कीजिए
जींदगी वन-डे मैच की तरह है जिसमें रन तो बढ़ रहे है पर ओवर घट रहे है मतलब धन तो बढ़ रहा है पर उम्र घट रही है इसलिए हर दिन कुछ न कुछ पूण्य के चौके छक्के लगायें... ताकि ऊपर बैठा एम्पायर हमें खुशियों की ट्रॉफी दे