जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
प्रॉब्लम सब के लिए एक जैसी हैं सिर्फ Attitude ही उसे अलग बनाता हैं
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
नीम कि जड़ में मीठा दूध डालने से नीम मीठा नहीं हो सकता, उसी प्रकार कितना भी समझाओ, दुर्जन व्यक्ति का साधु बनना मुश्किल है.
जैसे दीये को जलने के लिए तेल के साथ बाती की आवश्यकता होती है ठीक वैसे ही मनुष्य को सफलता के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है
प्रॉब्लम सब के लिए एक जैसी हैं सिर्फ Attitude ही उसे अलग बनाता हैं
“शिक्षक” और “सड़क” दोनों एक जैसे होते हैं खुद जहाँ है वहीं पर रहते हैं मगर दुसरो को उनकी मंजिल तक पहुंचा हीं देते हैं !
बातें ऐसी मत करो जिससे तुम्हारी परवरिश पर सवाल उठे
जिस काम में काम करने की हद पार ना हो फिर वो काम किसी काम का नही
नीम कि जड़ में मीठा दूध डालने से नीम मीठा नहीं हो सकता, उसी प्रकार कितना भी समझाओ, दुर्जन व्यक्ति का साधु बनना मुश्किल है.