अगर तुम एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हो, तो अपने आप को अपने उद्देश्य से बांध लो ना कि लोगो से।
जिसका हृदय सभी प्राणियों के लिए दया से परिपूर्ण है उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म- लेपन आदि से क्या लेना देना.
मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
जो किसी के FAN है उनका कभी कोई FAN नही बनता
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो
अगर तुम एक खुशहाल जीवन जीना चाहते हो, तो अपने आप को अपने उद्देश्य से बांध लो ना कि लोगो से।
जिसका हृदय सभी प्राणियों के लिए दया से परिपूर्ण है उसे ज्ञान, मोक्ष, जटा, भस्म- लेपन आदि से क्या लेना देना.
मौन एक ऐसा तर्क है जिसका खण्डन कर पाना अत्यंत दुष्कर है
हर प्रशंसा करने वाला आपका शुभचिंतक नही होता
जो किसी के FAN है उनका कभी कोई FAN नही बनता
मुस्कुराहटें झूठी भी हो सकती है.. इंसान को देखना नही समझना सीखो