कैसे गुज़र रही है सब पूछते है, कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |
माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??
कैसे गुज़र रही है सब पूछते है, कैसे गुजारता हु कोई नहीं पूछता |
माना की मरने वालों को भुला देतें है….सभी ...मुझे जिंदा भूलकर उसने कहावत ही बदल दी…
हम तो खुशियाँ उधार देने का कारोबार करते हैं साहब, कोई वक़्त पर लौटता नहीं हैं इसलिए घाटे मे है.
इस दुनिया के लोग भी कितने अजीब है ना, सारे खिलौने छोड़ कर जज़बातों से खेलते हैं
गजब का हमदर्द था मेरा, जो दर्द के सिवा कुछ दे ना सका
आसमान बरसे तो छाता ले सकते हैं.. आंख बरसे तो क्या किया जाए..??