निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.
निभा दिया उसने भी दस्तूर दुनिया का तो गिला कैसा पहचानता कौन है यहां मतलब निकल जाने के बाद...
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
दिल धोखे में है और धोखेबाज़ दिल में
कमाल करता है ऐ दिल तू भी उसे फुर्सत नहीं और तुझे चैन नहीं
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
खामोशियां बेवजह नहीं होती, कुछ दर्द आवाज छीन लिया करते हैं.