उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
उसकी मोहबत पे मेरा हक़ तो नहीं लेकिन, दिल करता है के उम्र भर उसका इंतज़ार करू !
जिन्हें नींद नहीं आती उन्हीं को मालूम है सुबह आने में कितने जमाने लगते है
बहुत कुछ लिखना है पर लफ्ज़ खामोश है।
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
ज़िन्दगी से भला क्या शिकायत करें बस जिसे चाहा उसने समझा ही नही
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!