रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले
किसी को क्या बताएं कितने मजबूर हैं हम, चाहा है एक तुम्हें और तुम्ही से दूर है हम
कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ
रोज़ नहीं पर कभी कभी तो वो शख्स मुझे जरूर सोचता होगा
ना शाख़ों ने जगह दी ना हवाओ ने बक़शा, वो पत्ता आवारा ना बनता तो क्या करता…..!!
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
अगर ख़ुशी मिलती है तुम्हे हम से जुदा होकर तोह दुआ है खुदा से की तुम्हे कभी हम न मिले
किसी को क्या बताएं कितने मजबूर हैं हम, चाहा है एक तुम्हें और तुम्ही से दूर है हम
कभी कभी मेरा दिल करता है कि बैठकर इतना रोऊ कि रोते रोते ही मर जाऊ