जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

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तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |

तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!

जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!

तुम हो तोह कुछ कमी नहीं .... तुम नहीं तोह कुछ नहीं ..

मुझ से पहले भी उसका कोई था मेरे बाद भी उसका कोई है

उसको मालूम तो हैं मेरे हालातो के बारे मे, फिर खैरियत पूछकर मेरी मुश्किलें क्यों बढ़ाते हैं |

तुम चाहते तो निभा भी सकते थे, मगर तुमने ऐसा कभी चाहा ही नहीं.

अधूरी ख़्वाहिश बनकर न रह जाना तुम ....दुबारा आने का इरादा नहीँ रखते हैं हम !!

जो कहते थे मुझे डर है कहीं मैं खो न दूँ तुम्हे, सामना होने पर मैंने उन्हें चुपचाप गुजरते देखा है... !!