जाने कैसे हो जाते हैं लोग कभी इसके कभी उसके और फिर किसी और के

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मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!

उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं

मरता था जिनके लिए वो अब मर गए है मेरे लिए.

काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता

कोरा कागज़ था और कुछ बिखरे हुए लफ़्ज़... ज़िक्र तेरा आया तो सारा कागज़ गुलाबी हो गया...!

हम ना पा सके तुझे मुदतो के चाहने के बाद, ओर किसी ने अपना बना लिया तुझे चंद रसमे निभाने के बाद !!

उसका वादा भी अजीब था कि जिन्दगी भर साथ निभायेंगे मैंने भी ये नहीं पुछा की मोहब्बत के साथ या यादों के साथ..!!

अब तो मोहब्बत भी सरकारी नौकरी जैसी लगती है, कम्बख्त ग़रीबों को तो मिलती ही नहीं