नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!
नींद आएगी तोह इस तरह सोयेंगे मुझे जगाने के लिया लोग रोयेंगे
काम तो कुछ करती नहीं थक जाती हूँ बस तुम्हेे सोचते सोचते...।।
उसका मिलना ही मुकद्दर में नहीं था वरना क्या क्या नहीं खोया उसे पाने के लिये
क्यों तुम खामोश हो गये..जी अब तक नहीं भरा था तेरी बातों से..
कोन कहता है कि आसुयो मे वजन नहीं होता, एक भी छलक जाता है तो मन हल्का हो जाता है ...
किताबों की तरह हैं हम भी….अल्फ़ाज़ से भरपूर, मगर ख़ामोश….!!