मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
वो शख्स एक छोटी सी बात पे यूँ चल दिया, जैसे उसे सदियों से किसी बहाने की तलाश थी .
वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं
मालूम है मुझे की ये मुमकिन नहीं मगर ? एक आस सी रहती है कि तुम याद करोगे मुझें ?
कल तक थी जो जान, आज बन गयी अनजान.
वो शख्स एक छोटी सी बात पे यूँ चल दिया, जैसे उसे सदियों से किसी बहाने की तलाश थी .
वो बोलते रहे, हम सुनते रहे - जबाब आँखों में था, वो लफ्जों मे ढूढते रहे
काश तू सिर्फ मेरे होता या फिर मिला ही ना होता
कमाल करता है तू भी ए दिल उसे फुर्सत नहीं है और तुझे चैन नहीं