कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
थोड़ी जगह दे दे मुझे तेरे पास कहीं रह जाऊं मैं खामोशियाँ तेरी सुनु ओर दूर कहीं ना जाऊं मैं
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
जिसे दिल मे जगह दी थी वो ही सब बर्बाद कर गया....!!
अब इन आँखों से भी जलन होती हैं मुझे ! खुली हो तो याद तेरी, और बंद हो तो ख्वाब तेरे !
कुछ नहीं लिखने को आज.... न बात, न ज़ज्बात
कुछ रुकी रुकी सी है ज़िन्दगी, कुछ चलते फिरते से है हम।
थोड़ी जगह दे दे मुझे तेरे पास कहीं रह जाऊं मैं खामोशियाँ तेरी सुनु ओर दूर कहीं ना जाऊं मैं
लफ्ज ढाई अक्षर ही थे.....कभी प्यार बन गए तो कभी जख्म.......
जिसे दिल मे जगह दी थी वो ही सब बर्बाद कर गया....!!
अब इन आँखों से भी जलन होती हैं मुझे ! खुली हो तो याद तेरी, और बंद हो तो ख्वाब तेरे !